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मौसम था बेईमान...
पीने का नशा न था मुझको यू ही शौक से दो घुट उतार लिए आज मौसम था बेईमान तो बस पांच मिनट महखाने में गुजार लिए एक अलग सी दुनिया की अनुभूति मिल...
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पीने का नशा न था मुझको यू ही शौक से दो घुट उतार लिए आज मौसम था बेईमान तो बस पांच मिनट महखाने में गुजार लिए एक अलग सी दुनिया की अनुभूति मिल...
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गुरूर था जिन्हें अपने ही उसूलों को दूसरों पे थोपने का आज उन्हीं उसूलों से समझौता करते देखा है। मैंने इसी युग में लोगों को बदलते देखा है। खे...
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